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नेफ्रोटिक सिंड्रोम: अर्थ, कारण, लक्षण और जटिलताएँ

नेफ्रोटिक सिंड्रोम एक गंभीर गुर्दा विकार है जिसके कारण मूत्र के माध्यम से अधिक मात्र में प्रोटीन बाहर निकलता है। यह विकार तब आता है, जब छोटे रक्त वाहिकाओं के उन छोटे समूहों को नुकसान होता है, जो गुर्दे में मौजूद ग्लोमेरुली बनाते हैं। इन छोटे रक्त वाहिकाओं का कार्य आपके रक्तप्रवाह को साफ करना और उनमे से अधिक पानी और अवशेष को निकालना है।

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रक्त में उचित द्रव स्तर को बनाए रखने के लिए आपके शरीर को रक्त प्रोटीन विशेष रूप से श्वेतक की आवश्यकता होती है और इसलिए एक सामान्य स्वस्थ glomeruli रक्त में श्वेतक को खींचने और छानने के जगह उसे रखने में मदद करती है। यह इस रक्त के प्रोटीन को मूत्र में मिलने या गुजरने से रोकता है।

जब glomeruli क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो प्रोटीन का मूत्र से निकलने का एक सीधा रास्ता बना देती है। एक बार जब ऐसा होना शुरू हो जाता है और मूत्र द्वारा अधिक मात्र में प्रोटीन निकलने लगता है, इसे नेफ्रोटिक सिंड्रोम कहते हैं।

ऐसे कई बीमारियाँ हैं जिससे glomerulus में खराबी आ सकती है, और जिससे नेफ्रोटिक सिंड्रोम हो सकता है। ऐसी कुछ बीमारियाँ निम्नलिखित हैं :

  1. मधुमेह गुर्दे की बीमारी :

गंभीर मधुमेह ,मधुमेह न्यूरोपैथी का कारण बन सकती है जो glomerulus को नुकसान पहुँचाता है। इससे फिर गुर्दे की विफलता हो जाती है।

  1. न्यूनतम परिवर्तन रोग :

बच्चों में glomerular विकार का यह प्रमुख कारण है। जब यह बीमारी होती है तो यह लगभग हमेशा गुर्दे की असामान्य क्रिया का नतीजा ही देती है। ज़्यादातर, जब प्रभावित ऊतक माइक्रोस्कोप के द्वारा देखा जाता है, तो कोशिकाएं हमेशा सामान्य या सामान्य जैसी ही दिखाई देती हैं, इसलिए यह नहीं पता चलता कि दोष कहाँ है। कोशिकाओं की किसी भी अनियमित्ता को दर्शाने की अक्षमता के कारण इसका कारण ज्ञात नहीं हो पा रहा है।

  1. Focal segmental glomeruloschlerosis:

यह गहरे धब्बों द्वारा पहचाना जाता है, जो कि बराबर हिस्सों में व्यवस्थित नहीं होते। यह धब्बे हमेशा बिखरे हुए दिखाई देते हैं। ज्यादातर, यह स्थिति अंतर्निहित बीमारी या आनुवंशिक विकार के परिणामस्वरूप होती है।    कभी-कभी, इस स्थिति में कोई स्रोत नहीं होता और यह अपने आप ही शुरू हो जाती  है।

  1. Membranous Nephropathy:

यह विशेष गुर्दे का विकार glomerulus के अंदर पाए जाने वाली आंतरिक झिल्लियों के मोटे होने की वजह से होता है। इसके मोटे होने का कारण पता नहीं चल पाया है, लेकिन आम तौर पर हेपेटाइटिस बी, मलेरिया, कैंसर और ल्यूपस जैसी कुछ अन्य स्थितियों में यह हो सकता है।

  1. Systemic Lupus erythematosus:

यह घोर और दीर्घ उत्तेजक बीमारी भी गुर्दे की घातक बीमारी को सक्रिय कर सकती है।

  1. Amyloidosis:
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यह गंभीर विकार अंगों में Amyloid प्रोटीन के अत्यधिक निर्माण या जमा होने से होता है। Amyloid प्रोटीन के निर्माण से गुर्दे के साफ करने के रास्ते को नुकसान पहुँचता है।

  1. गुर्दे की एक नस में खून का थक्का :

जब नस में रक्त के थक्के जैसी बीमारियाँ होती हैं, तो एक प्रवृत्ति होती है कि गुर्दे में नसों के भीतर रक्त जमाव मौजूद हो सकता है। जब एक इंसान को renal vein thrombosis होता है तो रक्त का थक्का एक गंभीर समस्या बन सकती है और जिससे नेफ्रोटिक सिंड्रोम हो सकता है ।

यदि आपको नेफ्रोटिक सिंड्रोम है, तो आपको निम्न संकेतों और लक्षणों का अनुभव होगा:

  1. गुर्दे के खराब होने के कारण से आपको सारे शरीर में गंभीर सूजन या एडीमा का अनुभव होगा, खासकर आंखों, पैरों और एड़ियों के आसपास।
  2. आप अपने मूत्र में झाग भी महसूस करेंगे जो कि आपके शरीर से अतिरिक्त प्रोटीन निकालने का स्पष्ट संकेत है।
  3. अचानक वजन बढ़ने के कारण मोटापा आना। यह शरीर में द्रव प्रतिधारण के परिणामस्वरूप होगा क्योंकि गुर्दे जो हमेशा शरीर से अतिरिक्त तरल पदार्थ को हटाने में मदद करते हैं, उसमे समस्याएँ हैं।
  4. थकान और अत्यधिक थकावट।
  5. भूक कि कमी।

इस बीमारी से जोखिम कारक जुड़े हैं और यदि आप सावधान नहीं हैं तो इस सिंड्रोम के विकसित होने की संभावना बढ़ सकती है। उनमे शामिल हैं :

  1. यदि आपको कुछ अंतर्निहित चिकित्सीय परेशानियाँ हैं, जैसे मधुमेह , lupus, amyloidosis, और गुर्दे से संबन्धित कोई रोग, जैसे की गुर्दे में पथरी , तो आपको नेफ्रोटिक सिंड्रोम होने का खतरा होता है।
  2. कुछ दवाइयाँ हैं जिनको अधिक मात्र में लेने से नेफ्रोटिक सिंड्रोम हो सकता है। Non-steriodal anti-inflammatory ड्रग्स जैसी दवाएं इन विकारों का कारण बन सकती हैं।
  3. एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और मलेरिया जैसे कुछ संक्रमण नेफ्रोटिक सिंड्रोम के होने की संभावना बढ़ा सकते हैं।

नेफ्रोटिक सिंड्रोम के साथ उत्पन्न होने वाली संभावित जटिलताओं में शामिल हैं:

  1. रक्त के थक्के:

रक्त के थक्के, glomerulus को सही और पर्याप्त रूप से साफ करने की अक्षमता की वजह से होते हैं। जिससे रक्त में प्रोटीन की कमी हो जाती है, विशेष रूप से albumin की। Albumin रक्त के थक्के को बनने से रोकता है और इसलिए अगर albumin भारी मात्र में कम हो जाये तो vein thrombosis होना शुरू हो जाता है। (नसों में रक्त के थक्के)

  1. रक्त में उच्च रक्त कोलेस्ट्रॉल और triglycerides का स्तर बढ़ना:

जैसे ही रक्त में albumin का स्तर कम होगा, आपका शरीर लीवर से और अधिक albumin उत्तपन्न करना शुरू कर देगा। इसका दुष्प्रभाव यह है कि जैसे ही लीवर होमियोस्टेसिस को बनाए रखने के लिए अधिक albumin उत्पन्न करता है, तो साथ ही यह कोलेस्ट्रॉल और triglycerides का उत्पादन भी करता है और यदि इसे नियंत्रित नहीं किया जाए, तो यह रक्त में उच्च कोलेस्ट्रॉल और triglycerides के स्तर को बढ़ाने का कारण बनता है।

  1. खराब पोषण :

रक्त में बहुत अधिक मात्रा में प्रोटीन की कमी से कुपोषण हो सकता है और वजन घटने का कारण बनता है, जिससे शरीर में सूजन आ जाती है। यह रक्त कोशिकाओं की कमी और विटामिन डी और कैल्शियम की कमी के कारण से अरक्तता का कारण बन सकता है।

  1. उच्च रक्तचाप:

जब glo को नुकसान होता है , गुर्दे फट जाते हैं तो इससे कारण रक्त पूरी तरह साफ नहीं हो पाता है जिससे रक्त में गंदगी जमा हो जाती है और इसलिए रक्तचाप बढ़ जाता है।

  1. अत्यधिक गुर्दे की विफलता :

एक बार जब गुर्दे glomerulus के अत्यधिक नुकसान के कारण रक्त को पूरी तरह से साफ करने की क्षमता खो देता है, तो इससे रक्त में गंदगी का तेजी से निर्माण हो सकता है। एक बार ऐसा होने के बाद, आपको एक आपातकालीन डायलिसिस की आवश्यकता होगी। अगर व्यक्ति को आपातकालीन डायलिसिस नहीं मिलता है, तो गंदगी के निर्माण से गुर्दे की विफलता हो सकती है।

  1. क्रोनिक गुर्दे का रोग :
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अनियंत्रित और उपचार ना किए गए नेफ्रोटिक सिंड्रोम, गुर्दे के सही तरीके से काम ना करने का कारण बन सकता है। यह इतना गंभीर हो सकता है कि किसी को डायलिसिस या पूर्ण किडनी प्रत्यारोपण की आवश्यकता हो सकती है।

  1. संक्रमण:

नेफ्रोटिक सिंड्रोम के कारण शरीर में रक्त में गंदगी के निर्माण के कारण संक्रमण हो सकता है। अगर इलाज नहीं किया गया , तो यह  संक्रमण बहुत ज्यादा बढ़ सकते हैं और बाद में सेप्सिस का कारण बन सकते हैं, जो अंततः मृत्यु का कारण बन सकता है।

एक बार जब आपको कोई लक्षण महसूस हो, या आप किसी भी जोखीम कारकों में आते हैं, तो उचित और पूरी तरह से जांच के लिए तुरंत अपने डॉक्टर से मिलने का प्रयास करें।

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नोट - यहां पर दी गई जानकारी केवल एक सलाह के तौर पर है। हम इनमें से किसी भी उपचार को आजमाने के लिए आप पर किसी प्रकार का कोई भी दबाब नहीं बना रहे हैं। अतः आपसे निवेदन है कि किसी भी उपचार को अपनाने से पहले किसी डॉक्टर अथवा विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

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